वैदिक ज्योतिष के मूल आधार
पाँच परस्पर जुड़ी प्रणालियाँ जो मिलकर हर वैदिक कुंडली पठन का आधार बनाती हैं: ग्रह, राशियाँ, भाव, चंद्र-मंडल और उदय-राशि आदर्श। हर एक एक द्वार है जिस पर आप अपनी समझ गहरी होने के साथ लौट सकते हैं।
9 नवग्रह — ग्रहीय देवता
सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, राहु, केतु। हर एक के अर्थ, गरिमा, मित्रताएँ, रत्न और मंत्र। हर कुंडली के अभिनेता।
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12 राशियाँ — सायन राशियाँ
मेष (Aries) से मीन (Pisces) तक। हर एक अपने स्वामी, तत्व, स्वरूप, अंगों और विशिष्ट स्वभाव के साथ। वे मंच जिन पर ग्रह काम करते हैं।
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12 भाव — जीवन के घर
स्व (1ला), धन (2रा), भाई-बहन (3रा), घर (4था), संतान (5वाँ)… जीवन का हर क्षेत्र एक विशिष्ट भाव में मानचित्रित। वे अखाड़े जिनमें ग्रह खेलते हैं।
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27 नक्षत्र — चंद्र-मंडल
अश्विनी से रेवती तक। चंद्र का पथ 27 स्थानों में विभाजित, हर एक के अपने स्वामी, देवता और चरित्र के साथ। आपके जन्म चंद्र का नक्षत्र आपकी पूरी दशा अनुक्रम को आकार देता है।
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12 लग्न आदर्श — हर उदय राशि के लिए जीवन कैसा दिखता है
कुंडली का सबसे व्यक्तिगत बिंदु। उदय राशि सब कुछ अपने विशिष्ट लेंस से फ़िल्टर करती है। अपने लग्न का आदर्श पढ़ें ताकि आप शरीर, स्वभाव और जीवन विषयों को समझ सकें जिनके साथ आप काम कर रहे हैं।
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